छींकते समय कभी ना करें ये गलतिया नही तो……

छींक

छींक एक बहोत ही शारीरिक क्रिया है जिसे हम सब करते है लेकिन कोई भी इसके प्रती ठीक तरह से जागरूक नही होता। जबकी छींक कई मायनों मे हमारे शरीर को लाभ पहुचाती है लेकिन इसके प्रती कुछ गलतिया आपके लिए बड़े सबक का काम भी कर सकतीं है।

वैसे तो हमे बचपन से सिखाया जाता है की खाना हमे कैसे खाना चाहिए, पानी कैसे पीना चाहिए या कैसे उठाना-बैठना चाहिए लेकिन कोई भी ठीक तरह से नही बताता की कैसे छींकना चाहिए या छींकते समय की सावधानियों को बरतना चाहिए। हमारे देश मे आस-पास कई लोग इसे बहोत ही आम समझने की भूल कर बैठते है।

छींक कभी भी अकारण नही आती जब शरीर को इसकी जरूरत होती है तो बस अचानक से ही आ जाती है। आज हम आपको बताने वाले है की छींक आने पर हमे क्या करना चाहिए या फिर क्या नही करना चाहिए व ये आती ही क्यो है।

क्यो आती है छींक

हमे छींक आने का मुख्य कारण हमारे शरीर का प्रतियात्मक क्रिया है। जब कोई भी छोटा से छोटा कण नाक के जरिए हमारे अंदर चला जाता है या किसी भी प्रकार की जलन व ऐसी ही कोई अनुभूती होती है तो हमारी नसे मस्तिस्क को सिग्नल भेजती है। इस पर हमारा शरीर तुरंत react करता है और एक तेज हवा नाक व मुह के द्वारा बाहर निकाला जाता है। जब हम छींकते है तो बाहर निकालने वाले हवा की रफ्तार 30 मील प्रती घंटा होती है।

खुलेआम ना छींके

अक्सर देखा जाता है की कई लोग कभी भी और काही भी छींक देते है इस पर कुछ लोग कहेंगे की छींक को रोक थोड़े ही सकते है यह सही बात है की हम आने वाली छींको को रोक नही सकते पर छींक आने पर रुमाल जैसी चीजों का प्रयोग तो कर सकते है। क्योकी छींकने पर हमारे नाक से कई तरह के बैक्टेरिया भी बाहर आ जाते है जो हवा के द्वारा ही सामने वाले व्यक्ती को बीमार कर सकते है।

हथेलियों का प्रयोग ना करें

जब आप छींकते है तो आपके मुह व नाक से निकला हुआ वायरस एक संक्रमण की तरह होता है जो 20 फीट की दूरी तक असर करता है। लेकिन जब आप छींकते समय अपनी हथेलियों से उसे रोक लेते है तो किटाणु आपके हांथों मे जमा हो जाते है जिसका पता आपको चलता ही नही। इसके बाद जो भी आप छुएंगे जैसे TV रिमोट, दरबाजे का हैडल, फोन सब इन्फेक्टेड हो जाएगा व दूसरे के इस्तेमाल करने पर उसके पास ये वायरस उस पर अपना असर देखाना शुरू कर देंगी।

क्या है सही तरीका

हमेशा अपने पास टिशू पेपर रखे और जब भी छींक आए तो इनका प्रयोग करें और फेंक दे इसके बाद जाकर अच्छे से अपना हांथ धोए। टिशू पेपर नही है तो रुमाल का प्रयोग करे या फिर फूल शर्ट पहन रखी है तो कोहनी से ढक ले। कपड़ा छींकने पर कीटाणुओ को अवशोषित कर लेता है जिससे वे खुले वातावरण मे फैल नही पाते। इसलिए कभी भी छींकने से पहले इसके किटाणुओ को रोकने की पहल पहले ही शुरू कर दें

क्यो ना रोंके छींक

जब भी आपको छींके आंती है तो आपके पूरे शरीर को एक झटका लगता है और बहोत सारी चीजे रुक जांती है यहां तक आपका दिल भी बहोत छोटे से हिस्से के लिए रुक जाता है और आप इस अचानक से होने वाली प्रतीक्रिया को रोकते है तो अंजाम बुरा हो सकता है। आपनी जान भी जा सकती है।

अगर किसी व्यक्ती को कान मे संक्रमण व ब्लड प्रेशर की समस्या है तो छींक रोकने पर नाक से खून आना, सिर दर्द जैसी कई समस्याए हो सकतीं है। कहा जाता है की एक बार एक ब्रिटिश नागरिक ने छींक आने पर अपनी नाक व मुह दोनों बन कर लिए थे जिसके कारण उसकी आवाज चली गई।

प्रतीरोधक क्षमता बढ़ाती हैं

छींके आपके शरीर की प्रतीरोधक क्षमता बढ़ा देंती है क्योकी छींकने के कारण कई हानीकारक किटाणु हमारे शरीर से बाहर निकाल जाते है व हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है इसलिए छींकना बहोत जरूरी है आपके बेहतर शारीरिक स्वास्थ के लिए।

धूप मे छींके

कुछ लोगो को शिकायत रहती है की जब भी वे धूप मे आते है तो छींके आंती है तो इससे आपको डरने की जरूरत नही हो क्योकी यह सामान्य है हर 10 से 35 प्रतीशत लोगो को यह समस्या है। शोधकर्ता बताते है की धूप मे हमारी प्रतीक्रियात्मक नशे सक्रिय हो जाती है जिसके कारण ऐसा होता है जिसे फोटिक स्नीज रिफ़्लेक्स या सोलर स्नीज रिफ़्लेक्स कहा जाता है।

जब भी कभी सार्वजनिक जगह या फिर किसी के सामने छींके तो उनसे माफी जरूर माँग ले। अक्सर हम भारतीय इन चीजों के लिए किसी से माफी नही मानते जो अच्छी बात नही है। 

the source of this article is dainik bhaskar

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