हमें पाद क्यों आती हैं? क्या इसे रोकना खतरनाक है

हमें पाद क्यों आती हैं? क्या इसे रोकना खतरनाक है

हमारी बहोत सी छोटी-छोटी शारीरिक क्रियाए होतीं है जिन्हे हम आम तौर पर नजर अंदाज कर देते है पर ये दैनिक क्रियाए हमारे शरीर के लिए बहोत ही जरूरी है और उनमे से एक है पाद

पादना हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जीतना पानी पीना या साँस लेना, इसको रोकना कस्टकारी व जानलेवा हो सकता है। हालाकी आज के सभ्य समाज मे इसे एक बेहूदापन व असभ्यता का प्रतीक माना जाता है। खासकर महिलाओ के लिए क्योकी कुछ लोगो के लिए महिला पाद जैसी कोई चीज नही होती।

पाद रोजमर्रा की ऐसी शारीरिक क्रिया है जिसके बारे मे लोग कम बात करते है इसके बारे मे किसी को कुछ नही सिखाया जाता और ना ही ज्यादा जानकारियाँ दी जाती। आज हम इसी से जुड़े कुछ जानकारिया पेश करने वाले है जैसे पाद आने का कारण, यह क्या होती है या बदबुदार पाद आना आदी।

पाद क्या होती है?

जब हम अपने गुदामार्ग से शरीर के अंदर की हवा को बाहर निकालते है तो उसे सामान्य भाषा मे पाद कहा जाता है। कई बार हवा हमारे शरीर मे खाना खाते समय पेट के अंदर चली जाती है जिसे हम पाद के जरिए बाहर निकाल देते है। इसके अलावा जब आप खाना खाते है व आपका खाना आपके पेट मे पहुचता है तो पाचन की क्रिया होती है और कई बार हम कुछ ऐसा खा लेते है जिसे पचाने मे हमारे शरीर को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, खाना ठीक से नही पचता जिसके दौरान उससे कुछ गैसे निकलती है ये गैसे हम अपने शरीर मे एकत्रित नही कर सकते इसीलिए शरीर इसे बाहर निकाल देता है ताकी शरीर पर किसी प्रकार का बुरा प्रभाव ना पड़े।

पादना बुरी आदत है क्या?

अब बात आती है सभ्य होने की क्योकी लोग आपको कहते है की यह बुरी आदत है इसे नही करना चाहिए। आप ही सोचिए क्या यह सच मे बुरा है, पादना सेहत के लिए बहोत ही लाभदायक होता है अगर आप इसे रोककर रखते है तो शरीर पर कई तरह का बुरा प्रभाव पड़ता है। हा अगर लोगो को इससे परेशानी होती है तो आप थोड़ी देर के लिए उठकर किसी एकांत जगह मे चले जाइए गैस निकालिए और वापस आ जाइए किसी को पता नही चलेगा। लेकिन आप इसे रोकते है तो आने वाले संकटों के लिए तैयार हो जाइए।

ऐसा लोग कहिते हैं. बचपन से आपको सिखा दिया गया है कि बुरा है तो आपने मान लिया कि बुरा होता है. और ऐसा पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ है. (इसलिए आज तक किसी महापुरुष की जीवनी में उनके किए तमाम गैरज़रूरी कामों के ज़िक्र के बावजूद उनके पादने का ज़िक्र नहीं मिलता) इसलिए आपने मान लिया है कि पादना बुरा है. लेकिन सच इससे बिलकुल उलट है. पादना अच्छी सेहत की निशानी है. ये बताता है कि आप पर्याप्त मात्रा में फाइबर खा रहे हैं और आपके शरीर में पाचक बैक्टीरिया की अच्छी संख्या मौजूद है.

पादने पर क्यों आती है बदबू ?

जब कोई व्यक्ती पादता है तो उसके पाद मे नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन, सल्फर व आक्सीजन की अलग-अलग मात्रा होती है। जिसमे सल्फर की मात्रा सबसे कम होती है लगभग एक प्रतीशत यही बदबू के लिए जिम्मेदार होता है। अगर आप अपने खाने मे ऐसे खाध्य पढ़ार्थ का उपयोग कर रहे है जिसमे सल्फर की मात्रा अत्यधिक होती है तो आपकी पाद से ज्यादा गंध आएगी। लेकिन इसका मतलब ये भी नही है की आप अपने खाने मे सल्फर का उपयोग ही ना करे, ये ठीक नही है क्योकी इसकी पर्याप्त मात्रा की जरूरत आपके शरीर को पड़ती है।

बहोत सी खाध्य वस्तुए है जिनमे सल्फर की अच्छी मात्र होती है जिनमे अंडे, पत्तागोभी, बीन्स, रेड मीट, सोडा और डेरी के उत्पाद जैसी चीज शामिल है। अब अगली बार जब भी आप पांदें तो जरूर याद कर लें की पिछली बार आपने क्या खाया था। क्या आप जानते है सल्फर की गंध सड़े अंडे की तरह होती है।

कुछ शोधो मे कहा गया है की पाद को सुंघना थोड़ा फायदेमंद हो सकता है। यह बात थोड़ी मूर्खतापूर्ण व हसाने वाली लग रही है पर इससे निकालने वाले गैस हाइड्रोजन सलफाइड की थोड़ी मात्रा सूँघने पर माइटोकॉन्ड्रिया को होने वाले नुकसान से बचा से बचा जा सकता है।

गंध से पता करें अपने शरीर की स्थिती

पाद की गंध को सूंघकर किसी भी व्यक्ती की स्वास्थ जानकारी जुटाई जा सकती है यह भले ही थोड़ा अजीब है पर सत्यता की परख कराती है। अगर आपके पादने पर बहोत ही भयंकर वाली बदबू आ रही है तो समझ लीजिए आपका शारीरिक स्वास्थ ठीक नही है। आपने अक्सर देखा होगा की  हाजमा खराब होने पर पादने मे गंदी बदबू आती है इसके आलावा कई बार यह भी कहा जाता है की इससे कोलॉन कैंसर का भी पता लगाया जा सकता है।

ज्यादा गंध इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की वजह से भी हो सकता है जो की एक बीमारी है इसलिए अगर आप के सांथ ऐसा लगातार हो रहा है तो डॉ से सलाह जरूर ले जिसका उपचार जो सके।

कई बार हम बहोत ही नॉर्मल पादते है जिसमे किसी भी तरह की गंध नही होती किसी को कुछ आभास नही होता। ये बस एक साधारण सी हवा होती है जो मुह के जरिए हमारे फेफडो मे ना जाकर पेट मे पहुच जाती है और पाद के जरीए बाहर निकल जाती है।

दिन मे कितनी बार पादना सेहत के लिए ठीक?

कोई भी औसतन व्यक्ती दिन मे कम से कम 10 से 15 बार पादता है कुछ मामलो मे ये कम या ज्यादा भी हो सकतें है। कई बार पेट साफ ना रखने से ये समस्या बढ़ जाती है क्योकी मल गैस उतपन्न करते है तो जितने ज्यादा देर तक आप मल को पेट मे रखेंगे यह समस्या बढ़ती जाएगी। अगर आप कम पादते है तो इसका मतलब है की आपके शरीर मे फाइबर की कमी है जो ठीक नही है।

क्या लड़कियां भी पादती हैं?

पादना मनुष्य की शारीरिक क्रिया है जिससे कोई भी नही बच सकता अगर कोई लड़की आपसे कहती है की वो नही पादती या उनके पेट मे गैस नही बनती तो वे साफ झूँठ बोल रही है क्योकी ऐसा संभव ही नही है। लड़कियाँ अक्सर इसे छुपाने की कोशिस करतीं है क्योकी शर्म का साया उन्हे ढक लेता है। इसके अलावा उन्हे कई बार सभ्य बनने के लिए हमेशा से सिखाया जाता रहा है की पादना या इस शब्द का प्रयोग करना भी ठीक नही है इसीलिए हममे से कई लोगो को लगता है की लड़किया पादती ही नही है।

हालाकी लड़के इस मामले मे खुशकिशमत होते है जो उन्हे ज्यादा छिपाना नही पड़ता या ढीठपना भी कह सकते है। जो की बहोत अच्छा है क्योकी यह सब जानते है इसे ज्यादा देर तक रोका नही जा सकता भरे ही वे भारत के प्रधानमंत्री ही क्यो ना हों।

आखिर मे आपको यह भी चिंता सता रही होगी की पादते समय आवाज करना सही या गलत, अगर सही है तो कितनी तेज या धीमी आवाज perfect है। पाद के समय आवाज आना बहोत ही normal है और आवाज कम या ज्यादा गैस के दवाब व आपके शारीरिक बनावट पर निर्भर करता है तो घावराने की जरूरत नही है।

तो अब आप समझ ही गए होंगे पाद का मतलब इसके आने की वजह व स्वास्थ के लिए यह क्यो जरूरी है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी या कुछ जानकारी जो हमसे छुट गई हो उसे comment मे बता सकते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *