फ्रेंच फ्राइज़ की शुरुआत कैसे हुई, क्या है इसका इतिहास

फ्रेंच फ्राइज़ की शुरुआत कैसे हुई

आज कल फास्टफूड का चलन बहोत तेजी से बढ़ रहा है जिसमे तरह-तरह की चीजे शामिल हैं इन्ही मे से एक है फ्रेंच फ्राइज़ जो लोगो को खूब भा रहा है। आजकल यह बहोत ही आम हो चुका है व हर वर्ग के लोगो को आकर्षित करता है खासकर युवा वर्ग को। फ्रेंच फ्राइज का स्वाद तो लाजवाव होता ही है साथ ही साथ आज इसे कई व्यंजनों के साथ सामावेश करके परोसा भी जा सकता है।

फ्रेंच फ़ाइज़ असल मे आलू के पतले व लंबे टुकड़े होते है जिन्हे तेल मे गहरा तला जाता है अलग-अलग देशो के अनुसार इनमे थोड़ा फर्क देखा जा सकता है। धीरे-धीरे ये अपनी जगह बनाता जा रहा है कई फास्टफूड आइटम्स भी फ़ाइज़ के आंगे फीके लगने लगे है। यही कारण है की फ़्रोजन फ़ाइज़ बड़ी मात्रा मे stores पर मिल जाते है जिन्हे घर लाकर बस आपको तलना होता है।

फ्राइज़ का इतिहास बड़ा ही दिलचस्प रहा है लेकिन यह बताना मुसकिल है की फ्रेंच फ्राइज़ की उत्पत्ती कहा हुई थी या इसे किसने बनाया था। आजकल दुनियाँ मे यह एक बहस का विषय भी बना हुआ है क्योकी किसी के पास लिखित मे कोई सबूत नही है। लेकिन फ्राइज़ के इतिहास के बारे मे जानने से पहले हमे आलुओ के इतिहास के बारे मे भी जानना पड़ेगा क्योकी फ्राइज़ का निर्माण आलू से ही तो होता है।

पेरू मे हुई थी आलू की उत्पती

कहा जाता है की आलू की खेती आज से लगभग 8000 साल पहले पेरू मे की जाती थी। पेरु ही आलू उत्पादन का स्त्रोत बना इसका निष्कर्ष कुछ अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दिया है समय के साथ आज यह दुनिया भर मे फैल गया है व भारत आज आलू उत्पादन मे चीन व रूस के बाद तीसरा स्थान रखता है।

सोलहवी सदी मे आलू यूरोप पहुचे

लगभग सोलहवी सदी का ही वो दौर था जब आलू की पहचान दूसरे देशो से हुई ये पहले कोलंबिया और वहाँ से होते हुए स्पेन पहुचा था। कहा जाता है जब स्पेनिश लोगो ने 1537 मे कोलंबिया पर हमला किया तो वहाँ उन्होने आलुओ की खेती देखी और उससे प्रभावित भी हुए इसीलिए वे इसे अपने साथ स्पेन ले आए सोलहवी सदी के अंत तक इसकी खेती एक क्रांती पकड़ने लगी। इसी तरह धीरे-धीरे ये पूरे यूरोप मे  आलू फैल गए।

फ्रेंच लोगो ने आलू को माना था बुरा

शुरुआती समय मे फ्रेंच लोग आलू को बेकार मानते थे उन्हे लगता था की आलू खाने से लोग बीमार हो जाते है इसलिए वे अपने जानवरो को इसे खिलाते थे। कहा जाता है की एक फ्रेंच आर्मी ऑफिसर को जेल हो गई थी उन्हे जेल मे आलू ही खिलाए जाते थे, जेल से बाहर आने पर उन्होने आलू की तारीफ की और लोगो को जागरूक करने लगे।

इसके आलावा यह भी कहा जाता है की एंथनी ऑगस्टीन पर्मेंटे ने आलुओ की खेती करवाई थी लेकिन कोई भी आलू नही लेना चाहता था तो उन्होने आलुओ पर पहरा लगवा दिया जिससे लोगो मे जिज्ञासा उत्पन्न होने लगी और आलू चोरी होने लगे। फ्रांस मे आलू की लोकप्रियता ऐसी हुई की 1785 मे वहा आलुओ का अकाल आ गया था।

1802 मे हुआ फ्रेंच फ्राइज़ का जन्म

फ्रेंच फ्राइज़ की उतपत्ती असल मे कहा हुई थी इस पर आज भी बड़े पैमाने पर बहस जारी है। कई विशेषज्ञों का कहना है की इन्हे बेल्जियम ने बनाया है तो काइयो का मानना है की यह फ्रेंच लोगो की दें है।

पहली कहानी के अनुसार म्यूज वैली मे रहने वाले किसान मछलियों को तल के खाया करते थे यह उनके पसंदीदा भोजन मे शामिल था। लेकिन जब ठंड का मौसम आता था तो बर्फ पड़ने लगती थी जिससे नदियाँ व झीले जम जाते थे ऐसे मे मछलियाँ पकड़ना बहोत मुसकिल था। तो उन्होने ठंड मे मछलियों के बदले आलुओ को तल कर खाना शूरु किया और फ्राइज़ की शुरुआत हुई।

दूसरी कहानी के अनुसार एंथनी ऑगस्टीन पर्मेंटे ने आलुओ की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उससे तरह-तरह के व्यजन बनाए उन्हे तलना शुरू किया और यह फ्रेंच लोगो के खाने मे शामिल हो गया। पर इसका लोकप्रिय नाम फ्रेंच फ्राइज यहाँ से नही पड़ा।

1966 मे अमेरिका पहुचा फ्रेंच फ्राइज़

थामस_जेफरसन

image source is wiki

 19वी सदी मे यह आयरिश लोगो का पसंदीदा खाना बन गया था वो इसे कई तरह की चीजों के साथ इस्तेमाल करते थे। इसके बाद कहा जाता है की वाईट हाउस मे रात्रीभोज के लिए थॉमस जेफरसन ने अपने शेफ को कहा की इन आलुओ को काटकर वैसे ही फ्राई कर दें जैसा की फ्रेंच लोग करते है शायद यही से इसका पारंपरिक नाम फेंच फ्राइज़ आया और उसे वहाँ के खास फास्ट फूड आइटम्स मे शामिल कर दिया गया। धीरे-धीरे इसने लोगो के अंदर जगह बनाई और आज पूरी दुनिया मे प्रशिद्ध है।

आज फ्राइज़ का अलग-अलग रूप पूरी दुनिया मे देखने को मिलता है व लोग इसे पसंद करते है बिना यह जाने की फ्रेंच फ्राइज़ का जन्म कहा हुआ था। वैसे भी हमे स्वाद से लेना-देना है।

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