Top 10 most longest bridges in india भारत के दस सबसे बड़े पुल

Top 10 most longest bridges in india

भारत आज बहोत ही तेजी से विकास की ओर बढ़ता जा रहा है और किसी भी देश का विकास वहा की यातायात सुविधाओ पर निर्भर करता है। भारत के पास आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क यातायात नेटवर्क है, बिना सड़कों के देश को तरक्की की रेस मे शामिल नही किया जा सकता। इन सड़कों को पूरा करने का काम पुल करते है। अगर पुल नही होते तो transport के साधन किसी काम नही आते। पुलो का काम होता है लंबी दूरी को कम करना व काम को आसान बनाना। इसके अलावा पुल देश के ऐसे क्षेत्रों को भी जोड़ने का काम करते है जो हमसे पूरी तरह Unconnected है।

यहा top 10 की list मे देश के सबसे बड़े पुलो को बताया गया है जो अपनी लम्बाई ही नही खूबसूरती के कारण भी पहचानी जाती है। इस लिस्ट मे सिर्फ पानी के ऊपर बने पुलो को ही शामिल किया गया है। तो जानते है है कौन से है भारत के सबसे लंबे पुल

Top 10 longest bridge in India

top 10 longest bridge in India

भूपेन हजारिका सेतु

top 10 के पहले नंबर पर है भूपेन हजारिका सेतु जो की भारत का सबसे लंबा पुल है जिसे ढोला-सदिया सेतु भी कहा जाता है। इसकी लम्बाई 9.15 किलोमीटर (30,000 फीट)  व चौड़ाई 64 फीट है। भूपेन हजारिका सेतु लोहित नदी के ऊपर बनी हुई है जो की ब्रह्मपुत्र नदी की एक मुख्य उपनदी है। यह दो परदेशो को जोड़ता है इसका पहला छोर अरुणाचल प्रदेश के ढोला कस्बे से शुरू होता है व असम के सदिया कस्बे मे ख़त्म होता है। इस पुल को बनाने का काम साल 2011 मे शुरू हुआ था जो लगभग 6 साल चला व 10 मार्च 2017 को इसका निर्माण कार्य ख़त्म हो गया। 26 मई 2017 को इसका उदघाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के हाथो द्वारा किया गया।

दिबांग नदी पुल ( Dibang River Bridge )

अगले नंबर पर है दिबांग पुल जो की भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल है और जिसकी लम्बाई 6.2 किलोमीटर (20,300 फीट) है। यह पुल भारत के अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से मे स्थित दिबांग नदी के ऊपर बनी हुई है। अप्रैल 2013 मे इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था जिसमे लगभग 750 करोड़ की लागत लगाई गई है हालाकी फरवरी 2018 मे इसे पास करने करने के लिए तकनीकी परीक्षण चल रहा था पर इसे अब तक लोगो के लिए चालू नही किया गया है। यह पुल NH13 से जुड़ी हुई है, कहा जा रहा है की दिबांग पुल राष्ट्र विरोधी गतीविधीयो और बॉर्डर एरिया की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण किरदार निभाएगा।

महात्मा गांधी सेतु

गंगा नदी पर बना महात्मा गांधी पुल भारत का तीसरा लंबा पुल है जिसे गांधी सेतु व गंगा सेतु के नाम से भी जाना जाता है। महात्मा गांधी सेतु की लम्बाई 5.75 किलोमीटर (18,860 फीट) व चौड़ाई 82 फीट है। गांधी सेतु पटना से हाजीपुर को जोड़ने का काम करता है, इसका निर्माण कार्य 1972 मे हुआ था जिसमे इसे बनाने ले लगभग 82 करोड़ का खर्च आया और यह 1982 मे बनाकर तैयार हुआ और उसी साल जनता के लिए भी इसे खोल दिया गया। गांधी सेतु का उदघाटन उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के द्वारा कराई गई थी। वर्तमान समय मे इस पुल से रोजाना 85,000 वाहन गुजरते है, जिसके कारण उसके बगल मे एक और पुल निर्माण की सोच रही है।

बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु

चौथे नंबर पर है बांद्रा-वर्ली समुद्र सेतु जिसे राजीव गांधी सागर सेतु भी कहा जाता है। इसकी लम्बाई 5.6 किलोमीटर (16,210 फीट) व चौड़ाई 66 फीट है। यह पुल मुम्बई के बांद्रा व वर्ली इलाके को आपस मे जोड़ता है, बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु को बनाने का काम सन 2000 मे शुरू हो गया था लेकिन इसे बनाने की योजना 1980 के समय चली आ रही थी। पुल बनाने का काम पूरी तरह से 24 मार्च 2010 को खत्म हुआ था लेकीन इसका उद्घाटन पहले ही सोनिया गांधी द्वारा 30 जून 2009 को कर दिया गया था क्योकी उस समय आठ लेन मे से चार बनाकर तैयार हो चुके थे। पहले बांद्रा से वर्ली पहुचने मे लगभग 80 मिनट लगते थे लेकिन इस पुल के जरिए 6 से 7 मिनट मे ही पहुचा जा सकता है।

बोगिबील सेतु ( Bogibeel bridge )

बोगिबील भारत की पाँचवा सबसे बड़ा पुल है जिसकी लम्बाई 4.94 किलोमीटर (16,210 फीट) है और यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर बना हुआ है। इसके अलावा यह भारत का सबसे बड़ा रेल-सह-सड़क सेतु है। यह पुल असम के धेमाजी और डिब्रुगढ़ को आपस मे जोड़ने का काम करता है। बोगिबील को बनाने का काम 2002 मे शुरू हुआ था जो की अभी तक चल रहा है संभावना यह है की 2018 के अंत तक इसे बना लीया जाएगा। अभी तक अनुमान लगाया जा रहा है की इसके निर्माण कार्य मे लगभग 50 billion तक खर्च किया गया है।

विक्रमशिला सेतु

भारत का 6वां सबसे लंबा पुल है विक्रमसेतु जो की गंगा के ऊपर बना हुआ है व जिसकी लम्बाई 4.7 किलोमीटर (15,400 फीट) है। यह पुल बिहार के भागलपुर मे स्थित है जिसे साल 2001 मे लोगो के लिए खोल दिया गया था। इसके अलावा इसमे दो लेन बने हुए है जिनमे दो बड़ी सड़के NH80NH31 एक दूसरे के विपरीत चलते है। विक्रमशिला मे लगातार बढ़ते यातायात की वजह से इसके बगल मे एक नया पुल बनाने पर विचार किया जा रहा है। जून 2018 मे इसकी मंजूरी भी दे दी गई है। बनने वाला पुल रेल-सह-सड़क सेतु होगा जिसकी लम्बाई 24 किलोमीटर तक हो सकती है।

Vembanad Rail Bridge

इस पुल को केरल के सुंदर प्राकृतिक झील vembanad के ऊपर बनाया है इसकी लम्बाई 4.62 किलोमीटर व चौड़ाई सिर्फ 16 फीट ही है।  यह पुल केरल के कोची मे एडप्पाली और वल्लारपदम स्थानो को आपस मे जोड़ता है इसलिए इसे एडप्पाली – वल्लारपदम पुल के नाम से भी जाना जाता है। इस पुल का निर्माण कार्य जून 2007 मे शुरू हुआ था जो चार सालो चार सालो तक चलता रहा और 31 मार्च 2010 मे इसका कार्य समाप्त हो गया था। 11 फरकरी 2011 मे Vembanad Rail Bridge को शुरू कर दिया गया। वर्तमान मे इस पुल से प्रतीदिन 15 ट्रेने गुजरती है।

दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल

दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल भारत का आठवां सबसे लंबा पुल है जिसे जे पी सेतु व लोकनायक जय प्रकास नारायण सेतु भी कहते है। इसकी लम्बाई 4.5 किलोमीटर (14,948 फीट) व चौड़ाई 33 फीट है। यह पुल गंगा नदी के ऊपर बना हुआ है जो पटना और सोनपुर को आपस मे जोड़ता है। दीघा सोनपुर पुल का निर्माण कार्य सन 2003 मे शुरू हुआ था और यह अगस्त 2015 तक चला इसके बाद उसके अगले साल 3 फरवरी 2016 को सबके लिए खोल दिया गया। दीघा सोनपुर पुल को बनाने मे 1,570 करोड़ की लागत आई है।

आरा-छपरा सेतु

आरा-छपरा सेतु देश का नौवा सबसे लंबा पुल है जिसे वीर कुँवर सिंह सेतु भी कहते है। इसकी कूल लम्बाई 4.3 किलोमीटर (14,270फीट) है। आरा-छपरा गंगा नदी के ऊपर बना पुल है जो बिहार के भोजपुर जिले मे बाबुरा व सारण जिले मे डोरीगंज को जोड़ता है। इसके कारण  आरा और छपरा की दूरी 100 किलोमीटर कम हो गई है। पुल का निर्माण कार्य साल 2010 मे शुरू किया गया जो 2017 मे जाकर खत्म हुआ व इसे 11 जून 2017 को आम जनता के लिए खोल दिया गया। आरा छपरा की कुल लागत अनुमानित 860 करोड़ बताई जाती है।

गोदावरी का चौथा पुल

top 10 की लिस्ट मे आखरी स्थान पर है गोदावरी पुल जो की भारत की दसवां सबसे बड़ा पुल है इसकी लम्बाई 4.13 किलोमीटर (13,566 फीट) है। यह गोदावरी के ऊपर बनाए गए चार पूलो मे से एक है इसे कोवुर-राजमुंदरी चौथा पुल के नाम से भी जाना जाता है। गोदावरी का यह पुल कोव्वुर को पूर्वी गोदावरी जिले में दीवाचेरवु से राजामंड्री बाईपास एक्सप्रेस रोड मे जोड़ देती है। इस पुल को बनाने का काम 2009 मे शुरू हुआ था जो 2012 मे बनकर तैयार हो गया। लेकिन कुछ कारणो के चलते कुछ देरी से 2015 मे सबके लिए खोल दिया। इसके निर्माण कार्य मे अनुमानित लागत 800 करोड़ बताई जाते है।

veerendra

I am a Blogger and entertaining content writer on its new think site. we share amazing content regularly on this platform. if you like the article share it on social media with your friends and family.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *